कलाकार
जन्म स्थान Hampstead, United Kingdom
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
जन्म: डोरिस मार्गरेट शॉ, 21 अप्रैल 1890, हैम्पस्टेड, यूनाइटेड किंगडम
मृत्यु: 31 जुलाई 1972
राष्ट्रीयता: अंग्रेजी
उनके पिता एक जहाज के डॉक्टर थे और उनकी माता कला की पूर्व छात्रा थीं।
वर्ष 1907 में परिवार टैविस्टॉक, कॉर्नवाल चला गया।
मात्र 15 वर्ष की आयु में उन्होंने न्यूलिन में एलिजाबेथ फोर्ब्स और स्टैनहोप फोर्ब्स द्वारा संचालित स्कूल ऑफ पेंटिंग में प्रवेश लिया।
वहाँ उनकी मुलाकात लौरा नाइट से हुई, जो उनके जीवनभर की मित्र और प्रेरणा बनीं।
उन्होंने अर्नेस्ट प्रॉक्टर के साथ पेरिस के एटेलियर कोलोरासी में कला का अध्ययन किया।
कलात्मक विकास और प्रभाव
प्रभाववाद (Impressionism) और उत्तर-प्रभाववाद (Post-Impressionism) आंदोलनों ने उनकी कला को गहराई से प्रभावित किया।
एलिजाबेथ फोर्ब्स और स्टैनहोप फोर्ब्स उनके गुरु रहे।
वे पियरे-अगस्त रेनॉयर और पॉल सेज़ान जैसे महान कलाकारों से प्रेरित थीं।
उन्होंने एक विशिष्ट शैली विकसित की, जो महिलाओं के कामुक चित्रों और कॉर्निश परिदृश्यों के लिए जानी जाती है।
उनकी प्रारंभिक कृतियों में समुद्र में कार्यरत उनके पिता को भेजे गए सचित्र "नेचर नोट्स" शामिल थे।
प्रमुख कार्य और उपलब्धियां
मॉर्निंग (1927): उनकी सबसे प्रसिद्ध कृति, एक मछुआरे की बेटी का चित्र, जिसने सनसनी फैला दी थी और जिसे टेट गैलरी के लिए डेली मेल द्वारा खरीदा गया था।
अर्ली मॉर्निंग: "मॉर्निंग" का एक छोटा संस्करण जो ब्राइटन के रॉयल पवेलियन में सुरक्षित है।
युवा महिलाओं की सरलीकृत और भव्य छवियों की एक श्रृंखला (लगभग 1922)।
अपने पति अर्नेस्ट प्रॉक्टर के साथ रंगून के कोकिने पैलेस को सजाने का महत्वपूर्ण कार्य सौंपा गया।
कई अवसरों पर रॉयल एकेडमी में उनकी कला का प्रदर्शन किया गया।
वर्ष 1927 में रॉयल एकेडमी समर एग्जीबिशन में “मॉर्निंग” के लिए उन्हें "पिक्चर ऑफ द ईयर" से सम्मानित किया गया।
परवर्ती जीवन और विरासत
1935 में अर्नेस्ट की मृत्यु के बाद, उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, जमैका और अफ्रीका की व्यापक यात्राएं कीं।
1966 में वे सेंट इव्स सोसाइटी ऑफ आर्टिस्ट्स (STISA) की अध्यक्ष बनीं।
वे न्यूलिन स्कूल सहित कई कलाकार संगठनों की सदस्य थीं।
उन्हें कॉर्नवाल के सेंट हिलेरी चर्च में उनके पति के बगल में दफनाया गया।
उनकी कला को कॉर्निश जीवन के मार्मिक चित्रण और बीसवीं सदी की शुरुआत की ब्रिटिश कला में उनके योगदान के लिए पहचाना जाता है।
ऐतिहासिक महत्व
वे न्यूलिन स्कूल के कलाकारों की एक प्रमुख हस्ती थीं।
अपनी अनूठी दृष्टि और शैली के लिए जानी जाती हैं जिसने आधुनिकता के भाव को जीवंत किया।
उनका चित्र "मॉर्निंग" बीसवीं सदी की ब्रिटिश कला की एक महत्वपूर्ण कृति मानी जाती है, जिसकी प्रशंसा इसकी "कामुक लेकिन गंभीर शैली" और कॉर्निश प्रकाश के चित्रण के लिए की जाती है।
उन्होंने बीसवीं सदी की शुरुआत में ब्रिटेन में चित्रकला (Portraiture) के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।