एक मिजाज चुनें और कमरा स्वयं उसका उत्तर देता है — रोशनी ठंडी या गर्म हो जाती है, हवा की गति बदल जाती है, और अंधेरे से केवल वही कलाकृतियाँ उभरकर सामने आती हैं जिनमें वह अहसास समाहित होता है। बाकी सब परछाइयों में ओझल हो जाता है।
प्रारंभिक जीवन और प्रशिक्षण एंजेलो डैल'ओका बियांका, जो एक महान इतालवी चित्रकार थे, का जन्म 1858 में वेरोना में हुआ था। उनकी कलात्मक यात्रा की शुरुआत वेरोना के सिग्नारोली अकादमी में 1873 से 1876 तक नेपोलियोना नानी के शिष्य के रूप में हुई। इसी समय के दौरान, उन्होंने वेनिस एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स में नग्न अध्ययन (nude studies) के पाठ्यक्रम में भी भाग लिया, जिसने उनके कौशल को एक नई गहराई प्रदान की। कलात्मक प्रभाव और शैली डैल'ओका बियांका की कल
ा पर उनके समकालीन प्रसिद्ध कलाकार जियाकोमो फावरेटो का गहरा प्रभाव था। उनकी शैली में फोटोग्राफी के प्रति एक विशेष रुचि भी झलकती है, जिसे उन्होंने 1882 में रोम प्रवास के दौरान विकसित किया था। विभिन्न प्रभावों के इसी अनूठे संगम ने वेरोना की पृष्ठभूमि पर आधारित मंत्रमुग्ध कर देने वाले 'जॉनर पेंटिंग्स' (genre paintings) को जन्म दिया। प्रमुख कृतियाँ और प्रदर्शनियाँ डैल'ओका बियांका की कुछ सबसे उल्लेखनीय कृतियों में शामिल हैं: द लव्स ऑफ सोल्स…