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Jane Clark
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अमेरिकी कला के इतिहास में जॉन स्मिबर्ट एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्यक्तित्व के रूप में स्थापित हैं, जिन्हें तेरह उपनिवेशों (Thirteen Colonies) में अपने परिष्कृत कौशल को लाने वाले पहले अकादमिक रूप से प्रशिक्षित कलाकार के रूप में पहचाना जाता है। एडिनबर्ग में जन्मे, स्कॉटलैंड में एक युवा प्रशिक्षु से लेकर नई दुनिया के एक प्रसिद्ध चित्रकार बनने तक का उनका सफर कलात्मक प्रवास की एक गहन गाथा है। उनके शुरुआती वर्ष शिल्प की व्यावहारिक बारीकियों से आकार लेते रहे, क्योंकि लंदन जाने से पहले उन्होंने एक हाउस पेंटर और प्लास्टरर के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त किया था। लंदन के जीवंत कलात्मक वातावरण में ही स्मिबर्ट ने वास्तव में अपनी दृष्टि को निखारना शुरू किया, जहाँ उन्होंने एक कोच पेंटर और प्रतिलिपिकार के रूप में कार्य किया और अंततः ग्रेट क्वीन स्ट्रीट अकादमी में प्रतिष्ठित सर गॉडफ्रे नेलर के मार्गदर्शन में अध्ययन किया। इस कठोर अकादमिक आधार ने उन्हें वह तकनीकी कौशल प्रदान किया जिसने बाद में उनके करियर को परिभाषित किया।
यूरोप की उनकी यात्राओं ने उनकी सौंदर्य संबंधी संवेदनाओं को और समृद्ध किया। 1719 और 1722 के बीच, स्मिबर्ट ने इटली की यात्रा की, जहाँ उन्होंने खुद को 'ओल्ड मास्टर्स' के अध्ययन में लीन कर लिया। टस्कनी के ग्रैंड ड्यूक के संग्रह में मौजूद कृतियों की नकल करके, उन्होंने प्रकाश, छाया और शास्त्रीय संरचना की सूक्ष्मताओं को आत्मसात किया। अवलोकन के इस गहन दौर ने उन्हें एक ऐसी शैली विकसित करने की अनुमति दी जो सूक्ष्म विवरण और कियारोस्क्यूरो (chiaroscuro) के कुशल उपयोग से पहचानी जाती थी, जिससे ऐसे चित्र बने जिनमें शारीरिक सटीकता और गहरा मनोवैज्ञानिक प्रभाव दोनों समाहित थे।
स्मिबर्ट के जीवन की दिशा तब अपरिवर्तनीय रूप से बदल गई जब उन्हें बिशप बर्कले द्वारा अमेरिका चलने के लिए प्रेरित किया गया। हालाँकि बरमूडा में एक कॉलेज स्थापित करने की महत्वाकांक्षी योजना कभी सफल नहीं हो सकी, लेकिन इस कदम ने स्मिबर्ट को बोस्टन में बसने का मार्ग प्रशस्त किया, जहाँ उन्होंने औपनिवेशिक परिदृश्य पर एक अमिट छाप छोड़ी। इस नए परिवेश में, वे उभरते अमेरिकी कला परिदृश्य के आधार स्तंभ बन गए, और उन्होंने चित्रकला की एक ऐसी परंपरा स्थापित की जिसने उनके पुत्र नथानिएल स्मिबर्ट सहित कलाकारों की कई पीढ़ियों को प्रभावित किया।
बोस्टन में स्मिबर्ट का कार्य अपने विषयों की गरिमा और सामाजिक स्थिति को पकड़ने की अद्भुत क्षमता के लिए जाना जाता है। उनके चित्र, जैसे कि रेव. जोसेफ सेवल और रिचर्ड बिल के चित्र, केवल साधारण आकृतियाँ मात्र नहीं हैं; वे चरित्र और प्रतिष्ठा का सावधानीपूर्वक किया गया अध्ययन हैं। इन कृतियों में, कोई भी निम्नलिखित तत्वों को देख सकता है:
उनकी सबसे प्रभावशाली उपलब्धियों में से एक डीन जॉर्ज बर्कले एंड हिज़ एंटौरेज है, जिसे द बरमूडा ग्रुप के रूप में भी जाना जाता है। यह पेंटिंग एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज के रूप में कार्य करती है, जो औपनिवेशिक महत्वाकांक्षा के एक विशिष्ट क्षण और अटलांटिक दुनिया के अंतर्संबंधों को कैद करती है। अपने ब्रश के माध्यम से, स्मिबर्ट ने केवल चेहरे नहीं बनाए; उन्होंने एक युग के सार को जीवंत किया, जिससे यूरोपीय अकादमिक परंपरा और उभरती हुई औपनिवेशिक अमेरिकी पहचान के बीच की खाई को पाटा जा सके।
1688 - 1751 , यूनाइटेड किंगडम