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      Oedipus Rex

      आकार और माप
      93.0 x 102.0 cm

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      संक्षिप्त विवरण

      • Influences: Sigmund Freud
      • Medium: Oil on Canvas
      • Subject or theme: Psychoanalysis, Sexuality
      • Dimensions: 93 x 102 cm
      • Artistic style: Symbolic Painting
      • Title: Oedipus Rex

      Oedipus Rex: A Surrealist Confrontation with Fate

      Max Ernst’s Oedipus Rex isn't merely a painting; it’s a meticulously crafted visual meditation on the inescapable grip of destiny and the unsettling truths hidden beneath the surface of consciousness—themes deeply rooted in Freud’s psychoanalytic theories. Created in 1922 during the height of Surrealism, this oil on canvas masterpiece transcends simple representation, plunging viewers into a dreamlike realm where symbols speak louder than literal imagery. Ernst's ambition wasn’t to depict Oedipus as a heroic figure battling fate; rather, he aimed to capture the psychological torment inherent in confronting one’s inescapable past and acknowledging the darker impulses within the human psyche.

      Psychoanalytic Influences: The Burden of Repression

      Ernst’s artistic vision was profoundly shaped by Sigmund Freud's groundbreaking explorations into the unconscious mind. Specifically, the Oedipus Complex—the subconscious desire for incestuous attraction to one’s mother and rivalry with one’s father—became a central preoccupation. Oedipus Rex embodies this complex through its unsettling juxtaposition of figures and objects. The hand extending from a window on a brick wall, clutching a walnut—a potent symbol representing the female body—immediately establishes a tension between desire and constraint. This visual representation directly confronts Freud’s assertion that repressed desires exert an irresistible influence over behavior.

      Symbolism and Interpretation: Fractured Reality

      The painting's intricate symbolism operates on multiple levels, inviting viewers to decipher its hidden meanings. The crack in the walnut serves as a visceral depiction of the vulva—a deliberate allusion to Freud’s concept of castration anxiety—highlighting the anxieties surrounding sexuality and vulnerability. Simultaneously, the bow and arrow piercing through both the hand and the nut symbolize patriarchal dominance and the suppression of feminine agency. Two birds encased in a box represent societal restrictions on aberrant desires; one tethered bird signifies conformity, while the dominant bird embodies rebellion against these constraints. Ernst’s masterful use of color—muted blues and ochres—further contributes to the painting's atmosphere of melancholy and unease. The spike piercing through the hand underscores the destructive potential of unresolved neuroses and reinforces the idea that confronting one’s inner demons demands courage and honesty.

      Artistic Style and Movement: Surrealist Innovation

      Max Ernst was undeniably a titan among Surrealist artists, recognized for his pioneering techniques and unwavering commitment to exploring the subconscious. His masterful application of oil on canvas—a medium favored by many Surrealists—creates a textured surface that enhances the painting’s dreamlike quality. Ernst's approach wasn't about achieving photographic realism; instead, he sought to evoke emotion and provoke contemplation through unexpected combinations of imagery and form. He skillfully employed frottage—rubbing textures onto canvas—and collage—assembling disparate elements—to generate images that defied logical explanation and tapped into the realm of irrational thought. This stylistic choice aligns perfectly with Surrealism’s manifesto, which championed automatism—allowing unconscious impulses to guide artistic creation—as a means of bypassing rational censorship.

      Other Works by Max Ernst: Expanding Horizons

      Beyond Oedipus Rex, Ernst’s oeuvre encompasses a remarkable range of artistic explorations—including Flowers of Seashells, a vibrant collage depicting fantastical flora and fauna; The Entire City, housed in the Kunsthaus Zurich, Switzerland—a monumental canvas reflecting Ernst’s fascination with urban landscapes; and A Swallow's Nest—another evocative collage exploring themes of isolation and vulnerability. These works demonstrate Ernst’s unwavering dedication to pushing the boundaries of artistic expression and confronting profound psychological questions—a legacy that continues to inspire artists and collectors alike.

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      प्रश्न और उत्तर

      मैक्स अर्न्स्ट द्वारा "Oedipus Rex" के रंग कितने सामंजस्यपूर्ण हैं?

      मैक्स अर्न्स्ट द्वारा "Oedipus Rex" में एक Discordant Palette रंग सामंजस्य प्रदर्शित होता है।

      मैक्स अर्न्स्ट द्वारा "Oedipus Rex" के लिए किस तकनीक का उपयोग किया गया था?

      मैक्स अर्न्स्ट द्वारा "Oedipus Rex" की माध्यम Oil On Canvas है। पुनरुत्पादन (reproductions) का उद्देश्य इस तकनीक के स्वरूप को जीवंत रूप में प्रस्तुत करना है।

      क्या "Oedipus Rex" में प्रकाश और छाया का गहरा कंट्रास्ट (contrast) दिखाई देता है?

      मैक्स अर्न्स्ट द्वारा "Oedipus Rex" का कंट्रास्ट स्तर Statement है।


      कलाकार का जीवन परिचय

      मैक्स अर्न्स्ट का जीवन और उनकी उत्पत्ति

      मैक्स अर्न्स्ट का जन्म 2 अप्रैल, 1891 को जर्मनी के ब्रुहल में हुआ था। उनका पालन-पोषण एक मध्यमवर्गीय कैथोलिक परिवार में हुआ, जहाँ वे नौ बच्चों में से तीसरे थे। उनके जीवन का प्रारंभिक स्वरूप उनके घर के शांत और अनुशासित वातावरण से आकार लेता रहा, जहाँ उनके पिता, फिलिप, बधिरों के शिक्षक के रूप में कार्यरत थे। फिलिप एक शौकिया चित्रकार भी थे, और उन्हीं के माध्यम से इस बालक का परिचय पहली बार कला के उपकरणों और उसकी साधना से हुआ।

      वर्ष 1909 तक, जब वे बोन विश्वविद्यालय के छात्र थे, मैक्स अर्न्स्ट ने चित्रकारी करना शुरू कर दिया था। उनके जीवन का यह प्रारंभिक दौर दृश्य जगत के प्रति बढ़ती हुई रुचि से चिह्नित था, हालाँकि उनका मार्ग अंततः कैनवास की सीमाओं से कहीं आगे निकल गया। वे कई माध्यमों के साधक बने, जिसमें उन्होंने एक चित्रकार, मूर्तिकार, प्रिंटमेकर, ग्राफिक कलाकार और कवि के रूप में अपनी पहचान बनाई। उनके शुरुआती वर्ष किसी एक दिशा को खोजने के बजाय, इस बात की एक बेचैन कर देने वाली जिज्ञासा के बारे में अधिक थे कि कैसे दुनिया और मन को अभिव्यक्त किया जा सकता है।

      शैक्षणिक खोज और प्रारंभिक कलात्मक प्रभाव

      मैक्स अर्न्स्ट की कला की ओर बढ़ती राह मानव मन और विचार की संरचनाओं के प्रति उनकी गहरी जिज्ञासा से आकार लेती रही। बोन विश्वविद्यालय में अध्ययन के दौरान, उनका ध्यान केवल ब्रश और कैनवास तक ही सीमित नहीं था। इसके बजाय, उन्होंने अपना समय दर्शनशास्त्र, कला इतिहास, साहित्य, मनोविज्ञान और मनोचिकित्सा के अध्ययन में बिताया। इन विषयों ने उन्हें दुनिया को समझने के लिए एक ऐसा ढांचा प्रदान किया जो केवल सौंदर्यशास्त्र से कहीं आगे था। वे अस्तित्व के अंतर्निहित कारणों में रुचि रखते थे, और मानव अभिव्यक्ति के इतिहास तथा मन की कार्यप्रणाली को समझने का प्रयास कर रहे थे। इसी बौद्धिक आधार ने उन्हें भविष्य में पारंपरिक चित्रण की सीमाओं को लांघने और अनुभव के अधिक छिपे हुए एवं अतार्किक स्तरों को खोजने में सक्षम बनाया।

      उनके शुरुआती वर्ष जर्मनी के कलात्मक समुदाय के साथ बढ़ते जुड़ाव से चिह्नित थे। 1911 में, वे 'डी राइनिश एक्सप्रेशनिस्टेन' (Die Rheinischen Expressionisten) समूह का हिस्सा बने। उनके जीवन का यह दौर एक नई दृश्य भाषा की खोज के लिए जाना जाता है। एक महत्वपूर्ण मोड़ 1912 में आया जब उन्होंने कोलोन में 'सोंडरबंद' प्रदर्शनी का दौरा किया। पाब्लो पिकासो, विन्सेंट वैन गॉग और पॉल गोगैं की कृतियों को देखना उनके दृष्टिकोण को बदलने वाला साबित हुआ। इन कलाकारों ने उन्हें स्थापित मानदंडों से मुक्त होने का एक मार्ग दिखाया। वे उनके दृष्टिकोणों की ओर आकर्षित हुए, जिसने उन्हें उस क्रांतिकारी प्रयोगों के मार्ग पर अग्रसर किया जो उनके करियर की पहचान बने।

      प्रथम विश्व युद्ध का प्रभाव

      प्रथम विश्व युद्ध के भड़कने से मैक्स अर्न्स्ट के जीवन की दिशा पूरी तरह से बदल गई। उन्हें सैन्य सेवा में भर्ती कर लिया गया, जहाँ उन्होंने चार साल तक मोर्चे पर एक सैनिक के रूप में बिताए। एक तोपची के रूप में सेवा करते हुए, उन्होंने पूर्वी और पश्चिमी दोनों मोर्चों की क्रूर वास्तविकताओं का सामना किया। यह अनुभव उनके अध्ययन में केवल एक व्यवधान मात्र नहीं था; बल्कि यह एक गहरा मनोवैज्ञानिक आघात था। उन्होंने जो अराजकता और विनाश देखा, उसने उन्हें भीतर तक झकझोर कर रख दिया, जिससे आधुनिक दुनिया और उसकी स्थापित व्यवस्थाओं के प्रति उनके मन में एक स्थायी संदेह पैदा हो गया।

      इस संघर्ष का आघात इतना गहरा था कि ऐसा लगा मानो इसने उनके पुराने अस्तित्व को ही मिटा दिया हो। अपनी आत्मकथा में, उन्होंने इस आंतरिक मृत्यु के बारे में आश्चर्यजनक स्पष्टता के साथ लिखा, जिसमें उन्होंने कहा कि 1 अगस्त, 1914 को मैक्स अर्न्स्ट की मृत्यु हो गई थी। हानि की इसी भावना और उसके बाद आए मोहभंग ने अंततः उन्हें उन आंदोलनों की ओर धकेल दिया, जो कट्टरपंथी और तर्कहीनता के विरोधी थे।

      दादावाद और कोलोन समूह

      प्रथम विश्व युद्ध की विभीषिका ने मैक्स अर्न्स्ट के मन में आधुनिक दुनिया की संरचनाओं के प्रति एक गहरा संदेह पैदा कर दिया। 1919 तक, यह मोहभंग कोलोन में एक स्वर बनकर उभरा, जहाँ उन्होंने हंस आरप और जोहान्स थियोडोर बारगेल्ड के साथ मिलकर 'कोलोन दादा समूह' की स्थापना की। यह गहन और बेचैन कर देने वाली रचनात्मकता का दौर था। अपने नए साथियों के साथ मिलकर, उन्होंने Der Strom और die Schammade जैसी अल्पकालिक पत्रिकाओं को शुरू करने में मदद की, जहाँ उन्होंने छपे हुए शब्दों का उपयोग कला की पारंपरिक सीमाओं को तोड़ने के लिए किया। यह उनके रचनात्मक कार्यों और उनके निजी जीवन, दोनों में क्रांतिकारी बदलावों का समय था, क्योंकि 1919 में उन्होंने कला इतिहास की छात्रा लुईस स्ट्रॉस से विवाह किया था।

      इन वर्षों के दौरान, मैक्स अर्न्स्ट पारंपरिक चित्रकला से दूर होने लगे और उन्होंने संयोजन (assembly) की कला में एक नई भाषा खोज ली। उन्होंने 1919 में अपने पहले कोलाज बनाए, जिसमें उन्होंने छवियों के विभिन्न टुकड़ों के साथ काम करके कुछ ऐसा बनाया जो अपने मूल हिस्सों से पूरी तरह से अलग था। इस काल का एक उल्लेखनीय प्रारंभिक उदाहरण Fiat modes है, जो लिथोग्राफ का एक पोर्टफोलियो था, जिसने इन खंडित रचनाओं में उनकी बढ़ती रुचि को प्रदर्शित किया। ये प्रयोग केवल शैलीगत विकल्प नहीं थे; बल्कि यह उस दुनिया में रास्ता खोजने का एक तरीका था जो अब तर्कसंगत या सुसंगत नहीं रह गई थी।

      पेरिस में अतियथार्थवादी आंदोलन

      वर्ष 1922 तक, वह बेचैन ऊर्जा जिसने उनके दादावादी वर्षों को ऊर्जा दी थी, उसे एक नया घर मिल गया जब मैक्स अर्न्स्ट फ्रांस चले गए। वे पेरिस के बौद्धिक हलकों में बस गए और अतियथार्थवादियों (Surrealists) के बीच अपनेपन का अहसास पाया। वे आंद्रे ब्रेटन के नेतृत्व वाले एक घनिष्ठ समूह का हिस्सा बन गए, एक ऐसा घेरा जो मानव मन के अजीब और अनछुए क्षेत्रों का मानचित्र तैयार करने का प्रयास कर रहा था। यह गहन सहयोग और साझा उद्देश्य का समय था, जहाँ कला क्या प्रदर्शित कर सकती है, उसकी सीमाओं को सपनों और अवचेतन की दुनिया में धकेला जा रहा था।

      इस समूह में उनकी उपस्थिति लिखित शब्दों और दृश्य छवियों के साथ उनके गहरे जुड़ाव से चिह्नित थी। उन्होंने पत्रिका लिटरेचर (Littérature) के लिए पॉल एलार्ड के साथ मिलकर काम किया, एक ऐसी परियोजना जिसने इस आंदोलन के विस्तार को परिभाषित करने में मदद की। ये वर्ष अतार्किकता को देखने के नए तरीकों की निरंतर खोज के लिए जाने जाते हैं। 1924 में, उनकी जिज्ञासा उन्हें पेरिस की सड़कों से बहुत दूर इंडो-चाइना ले गई, एक ऐसा अनुभव जिसने उनके विस्तृत होते विश्वदृष्टिकोण में और अधिक परतें जोड़ दीं।

      अभिनव तकनीकें और कलात्मक विधियाँ

      मैक्स अर्न्स्ट एक ऐसे बेचैन प्रयोगधर्मी कलाकार थे, जो सचेत मन के नियंत्रण से परे जाने का प्रयास करते थे। अपनी कल्पनाओं और आकृतियों को खोजने के लिए वे अक्सर आकस्मिकता और संयोग का सहारा लेते थे। इसी खोज ने उन्हें फ्रोटेज (frottage) जैसी तकनीक विकसित करने के लिए प्रेरित किया, जिसमें वे किसी बनावट वाली सतह पर कागज रखकर उस पर पेंसिल या चारकोल से रगड़ते थे। रगड़ने की इस सरल सी क्रिया ने लकड़ी के रेशों या पत्तियों की रेखाओं से अप्रत्याशित आकृतियों को उभरने का अवसर दिया। उन्होंने इस विचार को ग्राटेज (grattage) के साथ और विस्तार दिया, एक ऐसी प्रक्रिया जहाँ वे कैनवास पर लगे पेंट को खुरचकर उसके नीचे रखी वस्तुओं की बनावट को उजागर करते थे। इन विधियों ने उन्हें ऐसे परिदृश्य बनाने की अनुमति दी जो जैविक होने के साथ-साथ अत्यंत विचित्र और अजनबी भी महसूस होते थे।

      तर्कहीनता के प्रति उनके गहरे लगाव ने उन्हें डेकलकोमेनिया (decalcomania) की ओर भी अग्रसर किया। एक सतह से दूसरी सतह पर पेंट को दबाकर, वे ऐसे स्वप्निल विरूपण और परतों वाले प्रभाव पैदा करते थे, जो ऐसा आभास देते थे मानो वे किसी सपने से निकलकर आए हों। वे कोलाज (collage) कला में भी निपुण थे, जहाँ वे वैज्ञानिक चित्रों या पत्रिकाओं की कतरनों जैसे विविध तत्वों को बड़ी सावधानी से एक साथ जोड़कर ऐसी रचनाएँ बनाते थे जो वास्तविकता के हमारे बोध को चुनौती देती थीं। वे केवल किसी दृश्य का चित्रण नहीं करते थे; बल्कि वे अपने आस-पास की दुनिया के अंशों से एक नई दुनिया का निर्माण करते थे।

      पक्षियों का प्रतीकवाद और लॉपलोप

      पक्षियों के प्रति एक अजीब और व्यक्तिगत लगाव मैक्स अर्न्स्ट के पूरे जीवन में उनके साथ रहा। यह प्रकृति में केवल एक सामान्य रुचि नहीं थी, बल्कि एक गहरी मानसिक व्याकुलता थी जो उनके बचपन की एक स्मृति से उपजी थी। उन्हें वह क्षण याद था जब उनकी पसंदीदा पालतू पक्षी की मृत्यु ठीक उसी समय हुई थी जब उनकी छोटी बहन का जन्म हुआ था। इस संयोग ने उनके मन में जीवन और मृत्यु के विचार को एक साथ जोड़ दिया, जिससे पक्षी ऐसे प्रतीकों में बदल गए जिनमें अपशकुन और रहस्य दोनों समाहित थे। वे अक्सर उन्हें ऐसे जीवों के रूप में देखते थे जो मानवीय अनुभव और अलौकिक दुनिया के बीच की खाई को पाट सकते थे।

      इस आकर्षण ने अंततः एक भौतिक, लगभग मनोवैज्ञानिक रूप ले लिया, जो एक पक्षी जैसे फ्रायडियन 'अल्टर ईगो' के माध्यम से प्रकट हुआ, जिसे उन्होंने लॉपलोप नाम दिया। यह चरित्र केवल एक बार-बार आने वाला रूपांकन मात्र नहीं था; यह उनके मन के परिदृश्यों में एक मार्गदर्शक की तरह था। लॉपलोप ने पहली बार उनके 1929 के कोलाज उपन्यास, La Femme 100 Têtes में औपचारिक रूप से उपस्थिति दर्ज कराई। उस कृति में, पक्षी एक कथावाचक के रूप में कार्य करता है, जो पाठक को असेंबल की गई छवियों और खंडित वास्तविकताओं की एक श्रृंखला के माध्यम से ले जाता है। लॉपलोप के माध्यम से, मैक्स अर्न्स्ट ने अवचेतन मन की अतार्किक आवेगों को मानवीकृत करने का एक तरीका खोजा, जिससे उन्होंने अपने व्यक्तित्व के उन हिस्सों को एक चेहरा—या एक चोंच—दी जो तर्क को चुनौती देते थे।

      • Forest and Dove

      निर्वासन और संयुक्त राज्य अमेरिका में जीवन

      द्वितीय विश्व युद्ध की परछाइयाँ अंततः फ्रांस में कलाकार के सुरक्षित ठिकाने तक भी पहुँच गईं। 1938 में, राजनीतिक माहौल उनके विरुद्ध हो गया, और उन्हें एक्स-एन-प्रोवेंस के पास कैंप डेस मिलेस में नजरबंद कर दिया गया। कैद का यह दौर एक भारी बोझ की तरह था, विशेष रूप से तब जब नाजी शासन ने उन्हें एक अवांछित विदेशी घोषित कर दिया। जैसे-जैसे युद्ध तीव्र होता गया, उनकी स्थिति अनिश्चित होती गई, जिससे उन्हें यूरोप में बनाई गई अपनी जीवनशैली को पीछे छोड़कर जाने का कठिन निर्णय लेना पड़ा।

      पेगी गुगेनहाइम की मदद से सुरक्षा का एक मार्ग खुला। 1941 में, वे न्यूयॉर्क भाग गए, एक ऐसे शहर में जहाँ उनके कई समकालीन शरण ले रहे थे। यह पलायन केवल स्थान परिवर्तन नहीं था; यह एक पूर्ण विस्थापन था। 1942 में उन्होंने गुगेनहाइम से विवाह किया, और उस युग की उथल-पुथल के बीच उन्होंने एक-दूसरे में स्थिरता का अहसास पाया। संयुक्त राज्य अमेरिका में रहते हुए, उन्होंने अपनी तकनीकों के साथ प्रयोग करना जारी रखा, और अवचेतन की बनावटों को कैनवास पर उतारने के नए तरीके खोजते रहे।

      जीवन के अंतिम वर्ष और अंतिम कृतियाँ

      संयुक्त राज्य अमेरिका में कई वर्षों तक रहने के बाद, मैक्स अर्न्स्ट 1953 में पेरिस वापस लौट आए। यह वापसी उनके जीवन भर के प्रयोगों के लिए महत्वपूर्ण पहचान का एक दौर लेकर आई। 1954 में, उन्हें 27वें वेनिस द्विवार्षिक (Venice Biennale) में पेंटिंग के लिए ग्रैंड प्राइज से सम्मानित किया गया। कला जगत में उनकी उपस्थिति निरंतर बनी रही, क्योंकि उन्होंने अपने जीवन के अंतिम वर्षों तक अपनी कला के माध्यमों की सीमाओं को तलाशना जारी रखा।

      उनकी जिज्ञासा अक्सर उन्हें ऐसी सामग्रियों की ओर ले जाती थी जो नाजुक और स्थायी दोनों महसूस होती थीं। 1966 में, उन्होंने Immortel नामक कांच का एक शतरंज का खेल बनाया। यह कृति वस्तुओं के भौतिक गुणों में जादू खोजने की उनकी क्षमता को दर्शाती है, ठीक उसी तरह जैसे उन्होंने दशकों तक रगड़ने और खुरचने की तकनीकों के माध्यम से बनावटों को उजागर करने में बिताए थे। वे 1 अप्रैल, 1976 को पेरिस में अपनी मृत्यु तक अपनी रचनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहे।

      आज उनकी कृतियों को कहाँ देखा जा सकता है

      मैक्स अर्न्स्ट की बेचैन कल्पनाओं के पदचिह्नों को खोजने के लिए कई प्रमुख सांस्कृतिक केंद्रों की यात्रा करनी पड़ती है। वेनिस में, पेगी गुगेनहाइम कलेक्शन में उनकी वे कृतियाँ मौजूद हैं जो अतियथार्थवादी (Surrealist) समूह के साथ उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाती हैं। उनकी उपस्थिति मेट्रोपॉलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट के गलियारों में भी महसूस की जा सकती है, जहाँ बनावट और रूप के साथ उनके प्रयोगों को बीसवीं सदी की शुरुआत के कलात्मक बदलावों का अध्ययन करने वालों के लिए सहेज कर रखा गया है।

      यात्री एडिनबर्ग में नेशनल गैलरीज ऑफ स्कॉटलैंड में भी उनके काम का अनुभव कर सकते हैं। वहाँ का संग्रह उनके दृष्टिकोण को करीब से देखने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। उनकी अन्य महत्वपूर्ण कृतियाँ स्टाट्सगैलरी स्टटगार्ट और तेल अवीव म्यूजियम ऑफ आर्ट में भी पाई जा सकती हैं, जो यह सुनिश्चित करती हैं कि विभिन्न महाद्वीपों में उनका प्रभाव बना रहे। ये संस्थान उनकी भौतिक विरासत को जीवित रखते हैं, जिससे हमें उन वास्तविक सतहों को देखने का मौका मिलता जिन्हें उन्होंने अपनी छवियों को खोजने के लिए खुरचा और रगड़ा था।

      • द एंटायर सिटी (लगभग 1936)
      • यूरोप आफ्टर द रेन II (1942)
      • द रोबिंग ऑफ द ब्राइड (1940)
      • ओडिपस रेक्स (1922)
      • द एलीफेंट सेलेबेस (1921)
      मैक्स अर्न्स्ट

      मैक्स अर्न्स्ट

      1891 - 1976 , जर्मनी

      संक्षिप्त जानकारी

      • Artistic Movement Or Style:
        • दादावाद
        • अतियथार्थवाद
      • Artists Or Movements Influenced By This Artist: ['अतियथार्थवाद']
      • Artists Who Influenced This Artist:
        • पाब्लो पिकासो
        • विन्सेंट वैन गॉग
        • पॉल गोगुएन
      • Date Of Birth: 1891
      • Date Of Death: 1976
      • Full Name: मैक्सिमिलियन मारिया अर्न्स्ट
      • Nationality: जर्मन
      • Notable Artworks:
        • द एंटायर सिटी
        • यूक्लिडिस
        • ऑफ दिस मेन शाल नोथिंग
        • फॉरेस्ट एंड डव
      • Place Of Birth: ब्रुहल, जर्मनी